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इनवेस्‍टमेंट क्‍या होती है?

इनवेस्‍टमेंट क्‍या होती है?
लेकिन सोने-चांदी मे हमे Investment करने से पहले बहुत सारी बातें जान लेनी चाहिये जो की बहुत काम कि है. तो चलिये देखते है की Gold as an Investment कितना सही है या गलत.

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क्या है इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो, जानें कैसे बनाते हैं इसे और क्या रखनी चाहिए सावधानियां

By: एबीपी न्यूज | Updated at : 24 May 2021 02:33 PM (IST)

शेयर बाजार (फाइल फोटो)

इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए आसान काम नहीं होता है. अमूमन इसे संतुलित बनाने पर जोर दिया जाता है. अगर सही दृष्टिकोण और वित्तीय लक्ष्य साफ हों तो एक बेहतर पोर्टफोलियो बनाया जा सकता है. पोर्टफोलियो, निवेशक के कुल निवेश किए गए एसेट्स को दिखाता है. इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो निवेशक के पास मौजूदा एसेट्स का समूह है. इसमें शेयर, बॉन्ड, रियल एस्टेट, गोल्ड वगैरह हो सकते हैं. इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट एसेट्स को एक जगह वर्गीकृत कता है. मान लीजिये अगर किसी के पास किसी निवेशक के पास म्यूचुअल फंड भी है और उसे प्रोविडेंट फंड से भी नियमित आय होती है. निवेश से जुड़े फैसले लेते समय इन अकाउंट्स को देखने की जरूरत होती है.

लाइफ की अलग-अलग स्टेज में किस तरह करें इनवेस्टमेंट प्लानिंग? जानिए यहां

लाइफ की अलग-अलग स्टेज में आपकी जरूरतें अलग-अलग होती हैं। आप इसके लिए जितना जल्दी निवेश करना शुरू करेंगे उतना बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार कर पाएंगे। लोग अपने जीवन की अलग-अलग स्टेज में अलग-अलग फाइनेंशिल गोल्स के लिए प्लानिंग करते हैं।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। लोग अलग-अलग फाइनेंशियल गोल्स के लिए सेविंग और इनवेस्टमेंट करते हैं। किसी को अपनी उच्च शिक्षा के लिए पैसा चाहिए होता है, तो किसी को नई बाइक के लिए। कोई नई कार लाना चाहता है, तो कोई नया घर। अपनी और अपने भाई-बहनों की शादी के लिए भी लोग सेविंग्स और इनवेस्टमेंट करते हैं। सबसे लंबी अवधि वाली फाइनेंशियल प्लानिंग रिटायरमेंट प्लानिंग होती है। आप इसके लिए जितना जल्दी निवेश करना शुरू करेंगे, उतना बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार कर पाएंगे। लोग अपने जीवन की अलग-अलग स्टेज में अलग-अलग फाइनेंशिल गोल्स के लिए प्लानिंग करते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।

विवाह से पहले

विवाह से पहले इनवेस्‍टमेंट क्‍या होती है? व्यक्ति पर अधिक जिम्मेदारियां नहीं होती हैं, इसलिए यह बचत और निवेश का सबसे बढ़िया समय होता है। यह ऐसा समय है, जब आपके पास एक जॉब होती है और आप आत्मनिर्भर होते हैं। आप अपनी सैलरी का अधिकतम हिस्सा निवेश कर सकते हैं। इस स्टेज में आप अधिक जोखिम वाले निवेश विकल्पों में निवेश कर सकते हैं। जैसे- स्टॉक्स, स्मॉल कैप फंड्स, मिड-कैप फंड्स, इक्विटी फंड्स, आईपीओ आदि। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस स्टेज में आप अपने पोर्टफोलियो के 80 से 90 फीसदी हिस्से में स्टॉक्स रख सकते हैं। शेष बचे हिस्से में बांड आदि रख सकते हैं। बता दें कि 5पैसा डॉट कॉम फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए एक बेहतर प्लेटफॉर्म है। यहां आप म्यूचुअल फंड में भी पैसा लगा सकते हैं। खास बात यह है कि यहां जीरो ब्रोकरेज की सुविधा मिलती है।

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पैरेंट्स

तीसरी स्टेज वह है, जब आप पैरेंट्स बनते हैं। इस स्टेज में आपको अपने बच्चों की एजुकेशन, उनकी शादी, अपने रिटायरमेंट आदि की चिंता होती है। आप इन गोल्स के लिए सेविंग और इनवेस्टमेंट करते हैं। ऐसे में आपको गोल बेस्ट इनवेस्टमेंट पर ध्यान देना चाहिए। किसी भी वित्तीय संकट से बचने के लिए आपके पास पर्याप्त लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस होना चाहिए। इस स्टेज में आप डेट फंड्स, एफडी और हाइब्रिड फंड्स में पैसा लगा सकते हैं। इस स्टेज में आपके पोर्टफोलियो का 50 से 70 फीसदी हिस्सा स्टॉक्स का हो सकता है।

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Investment Tips: क्या आपका म्यूचुअल फंड निवेश नुकसान में है? तो जानिए अपनी कैपिटल बचाने के सटीक तरीके

म्‍यूचुअल फंड (Mutual Fund) एक बेहतरीन इनवेस्‍टमेंट टूल है.

म्‍यूचुअल फंड (Mutual Fund) एक बेहतरीन इनवेस्‍टमेंट टूल है.

ऐसे निवेशक जो कम जोखिम उठाकर इक्विटी मार्केट में निवेश (Investing In Equity Market) करना चाहते हैं उनके लिए म्‍यूचुअल फंड (Mutual Fund) एक बेहतरीन इनवेस्‍टमेंट टूल है. पर अगर म्यूचुअल फंड्स में नुकसान से बचने के क्या तरीके हैं? जानिए..

  • News18Hindi
  • Last Updated : July 21, 2022, 12:29 IST
म्‍यूचुअल फंड इनवेस्‍टमेंट क्‍या होती है? के माध्‍यम से इक्विटी मार्केट में निवेश को अन्‍य तरीकों से ज्‍यादा जोखिमरहित माना जाता है.
बाजार में गिरावट के दौरान भी अगर निवेशक निवेश बरकरार रखता है तो उसे लॉन्‍ग टर्म में फायदा होता है.
नुकसान से बचने के लिए निवेश में विविधता होनी आवश्‍यक है.

नई दिल्‍ली. जब आप इक्विटी मार्केट (Equity Market) या इससे संबंधित इनवेस्‍टमेंट टूल्‍स में निवेश करते हैं तो फायदे के साथ-साथ नुकसान होने की संभावना भी रहती है. अगर निवेशक ने जैसा सोचकर निवेश किया है और वैसा न हो तो इनवेस्‍टर अपनी मूल पूंजी (कैपिटल) भी खो सकता है. हालांकि यह भी एक हकीकत है कि हाई रिस्‍क निवेश शानदार रिटर्न भी देता है.

4. Mutual Fund Gold क्या है?

म्युचुअल फंड मे कई प्रकार के फंड होते है, जैसे Small Cap equity fund, Large Cap Equity Fund, Dept Fund, Direct fund वैसे ही Gold Fund भी शामिल होते है इसमे आप इनवेस्‍टमेंट क्‍या होती है? इसके युनिट्स खरिद सकते है जो की जैसे गोल्ड की किंमत बढेगी या गिरेगी वैसे आपके खरिदे हुये युनिट्स की किमते बढेगी या गिरेगी.

आप चाहे तो सोने को Commodity Market मे Trading करने के लिये खरिद और बेच भी सकते है. लेकिन यह आप एक सिमीत समय के लिये ही खरिद सकते है इसकी महिने और हप्ते के हिसाब से एक्सपायरी होती है उस हिसाब से आप इसे खरिद सकते है और इसमे ट्रेडिंग कर सकते है.

Gold Investment Returns कितना मिलता है?

यह कोई फिक्स्ड नहीं होता कभी कभी बहुत जादा रिटर्न इसमे मिल जाते है, 30,40 साल पहले अगर आप इसमे इनवेस्टमेंट करते तो वह अच्छा तरिका था लेकिन कई कारणों से फिलाल के कुछ वर्षों का रिटर्न्स देखे तो बहुत सिमित रह गये है.

अवरेज देखा जाये तो इनमे बॅक और दुसरे तरिके से जादा रिटर्न्स आपको मिल जाते है लेकिन कई कई बार यह सिमित दायरे मे ही रहता है.

डाॅलर और रुपयों कि किमते का गोल्ड पर असर नहीं पडता लेकिन जादूगर सोना Import किया जाता है इसलिये इसकी रुपया गिरते ही सोने की मांग भी कम हो इनवेस्‍टमेंट क्‍या होती है? जाती है.

जब भी अमेरिकन डाॅलर गिरता है तब सोने की मांग है क्योंकि आंतरराष्ट्रीय बाजार मे सोने की किमते डाॅलर मे होती है इसलिये बाजार मे कमजोरी आने पर लोग सोने की तरफ देखते है.

जब भी शेअर मार्केट आदी गिरता है तो लोग वहीं पैसा सोने मे इनवेस्टमेंट करने के लिये इस्तमाल करते है. तब अमूमन सोने के भाव बढते है.

आज का सोने का भाव कितना चल रहा है?

आज 15 जुलै को आज के सोने का भाव देखे तो यह लगभग 1 तोला ( 24 करेंट) सोने का भाव 49,960 भारतीय रुपये चल रहा है.

यही सोने का भाव दिसंबर 2016 को लगभग 27400 रुपयें चल रहा था. अगष्ट 2020 में यही सोने का भाव लगभग 57000 रुपयों तक पोहच गया था.

Mutual Fund: इक्विटी या डेट म्यूचुअल फंड में क्या है अंतर? आपके लिए क्या है बेहतर?

Mutual Fund: इक्विटी या डेट म्यूचुअल फंड में क्या है अंतर? आपके लिए क्या है बेहतर?

अगर आप अपने लाइफ के टार्गेट को लेकर स्पष्ट है तो आपके लिए निवेश स्कीम चुनना काफी आसान है.

म्यूचुअल फंड्स एक तरह का फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट है. इसके जरिए स्टॉक, गवर्नमेंट और कार्पोरेट बॉन्ड, डेट इंस्ट्रूमेंट्स और गोल्ड स्कीम में निवेश किया जाता इनवेस्‍टमेंट क्‍या होती है? है. पूरी तैयारी के साथ म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश किया जाए तो बेहतर रिजल्ट देखने को मिलते हैं. हालांकि ये जरूरी नहीं कि सभी प्रकार के म्यूचुअल फंड सभी निवेशकों के लिए बेहतर हों. ऐसे में म्यूचुअल फंड में इनवेस्टमेंट से पहले निवेशकों को उसके बारे में जरूरी जानकारी जुटा लेनी चाहिए. साथ ही निवेशकों को अपनी रिस्क लेने की क्षमता, जरूरतों, टार्गेट और स्कीम की टेन्योर समेत तमाम पहलुओं को समझ लेना जरूरी है.

इक्विटी म्यूचुअल फंड्स

इक्विटी म्यूचुअल फंड्स या ग्रोथ ओरिएंटेड फंड्स एक बेहद खास स्कीम है. इस स्कीम के तहत स्टॉक एक्सचेंज मार्केट में लिस्टेड विभिन्न कंपनियों के शेयर में निवेशक के एसेट्स को इनवेस्ट किया जाता है. ये स्कीम निवेशकों को उनके पैसे अलग-अलग इनवेस्‍टमेंट क्‍या होती है? सेक्टर की कई कंपनियों के शेयर में निवेश का मौका देता है. यही स्ट्रेटेजी निवेशक को जोखिम से बचाता है और उसके कारोबार में बड़े पैमाने पर बढ़ोत्तरी करने में मददगार होता है.

मिसाल के तौर पर समझिए कि एक निवेशक अपना 1000 रुपये इक्विटी म्यूचुअल फंड के माध्यम से 50 कंपनियों में निवेश किया. जिन कंपनियों के शेयर में निवेशक के एसेट्स इनवेस्ट किए गए उन सभी में उसका अनुपातिक लिहाज से मालिकाना हक हो जाता है. और सभी कंपनियां उसके पोर्टफोलियो में शामिल भी हो जाती हैं. जिन कंपनियों के शेयर में निवेशक के एसेट्स लगे हैं. अगर उनमें से कुछ स्टॉक अच्छा परफार्म नहीं कर पाए तो बाकी बचे निवेशक के पोर्टफोलियो में शामिल बेहतर परफार्मेंश वाले स्टॉक बुरे प्रभाव को कम करने या उस प्रभाव की भरपाई करके इनवेस्टमेंट वैल्यू को बेहतर बनाने का काम करते हैं. ऐसे में निवेशक को डावर्सिफाई पोर्टफोलियो और रिस्क एडजस्टेड रिटर्न के फायदे मिलते हैं.

डेट म्यूचुअल फंड्स

इक्विटी फंड के मुकाबले डेट म्यूचुअल फंड ज्यादा सुरक्षित और स्थायी है. हालांकि लंबी अवधि के निवेश में ये इक्विटी फंड के मुकाबले कम रिटर्न देते हैं. लेकिन बैंक के सेविंग अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉडिट, पोस्ट ऑफिस स्कीम पर मिलने वाले रिटर्न की तुलना में डेट म्यूचुअल फंड के रिटर्न बेहतर होते हैं. इक्विटी फंड की तरह इनमें भी निवेशक के पास डावर्सिफाइड पोर्टफोलियो होता है. इसमें निवेशक का पैसा फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटी (fixed-income securities), मसलन कार्पोरेट बॉन्ड (Corporate Bonds), गवर्नमेंट सिक्योरिटीज़ (Government Securities) और ट्रेजरी बिल (Treasury Bills) में निवेश किया जाता है. इस पर मिलने वाले रिटर्न का अनुमान कुछ हद तक पहले से लगाया जा सकता है.

टैक्स के लिहाज से देखा जाए तो डेट स्कीम पर तीन साल के भीतर मिलने वाले गेन को शार्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) कहते हैं. तीन साल के बाद के प्रॉफिट को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन ( LTCG) कहते हैं, अगर आप डेट फंड की यूनिट्स को खरीदने के तीन साल के भीतर बेचते हैं, तो इनवेस्‍टमेंट क्‍या होती है? उस पर हासिल प्रॉफिट पर निवेशक के टैक्स स्लैब के आधार पर टैक्स देना पड़ता है. मिसाल इनवेस्‍टमेंट क्‍या होती है? के तौर पर अगर एक निवेशक की टैक्स के दायरे में आने वाली इनकम 6,00,000 रुपये है और उसका STCG 1,00,000 रुपये है तो उसे 7,00,000 रुपये पर टैक्स देना होगा. डेट म्यूचुअल फंड में तीन साल या उससे अधिक समय तक निवेश किया गया हो तो उस पर होने वाले कैपिटल गेन पर इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ 20% टैक्स लगता है.

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