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कॉमर्स प्लेटफार्मों की तुलना

कॉमर्स प्लेटफार्मों की तुलना

ई-कॉमर्स साइट पर उत्पादों में देश का नाम बताए जाने की मांग, अदालत ने केंद्र से मांगी राय

ई-कॉमर्स वेबसाइट पर बेचे जाने वाले उत्पादों को किस देश में बनाया गया है, इसकी जानकारी देने के लिए दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र से राय मांगी है.

By: एजेंसी | Updated at : 01 Jul 2020 01:29 PM (IST)

नई दिल्ली: ई-कॉमर्स वेबसाइट पर बेचे जाने वाले उत्पादों को किस देश में बनाया गया है, इसकी जानकारी देने के लिए दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र से राय मांगी है. मुख्य न्यायाधीश डी.एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने केंद्र और ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों अमेजन, फ्लिपकार्ट और स्नैपडील को नोटिस जारी कर 22 जुलाई तक याचिका पर अपना पक्ष रखने के लिए कहा है.

मेट्रोलॉजी एक्ट 2009 को लागू करने की बात वकील ने की

केंद्र सरकार के स्थायी वकील अजय दिग्पाल ने उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की ओर से नोटिस स्वीकार किया. जनहित याचिका में एक वकील ने लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट 2009 को लागू करने और इसके तहत उन नियमों को लागू करने की मांग की, जिनके अनुसार ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर बेचे जा रहे उत्पादों पर उन्हें किस देश में बनाया गया है, इसका उल्लेख करना जरूरी है.

केंद्र सरकार ने भारतीय वस्तुओं को बढ़ावा देने की अपील की है

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याचिका में दावा किया गया है कि ई-कॉमर्स संस्थाओं के संबंध में इस आदेश को लागू नहीं किया गया. याचिका में कहा गया कि केंद्र सरकार ने भारतीय वस्तुओं को बढ़ावा देने और खरीदने की अपील की है और ऐसे में जरूरी है कि इस आदेश को लागू किया जाए.

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Published at : 01 Jul 2020 01:29 PM (IST) Tags: Central Goverment Delhi High Court India हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: News in Hindi

झेलम कॉर्ट : कश्मीर के तीन युवकों का ऐसा ई-कॉमर्स प्लेटफार्म जहां मोल-भाव के साथ कॉमर्स प्लेटफार्मों की तुलना कर सकते हैं खरीदारी

यदि आप गैर कश्मीरी हैं, पर इस सूबे की कलाकृतियां, खाने-पीने के सामान, मेवा, कपड़े, खास तरह के जूते, कश्मीरी नक्कासीदार सामान पसंद करते हैं और इसे देश-विदेश के किसी हिस्से में रहते हुए पूरे मोल-भाव के साथ कम कीमत पर खरीदना चाहते हैं तो श्रीनगर एवं अनंतनाग के तीन उद्यमियों अहमद नबील वानी, नवीद कादिर वानी और आरिफ अहमद द्वारा विकसित ई-कॉमर्स वेबसाइट ‘झेलम कॉर्ट’ आपकी भरपूर मदद कर सकता है.

यही नहीं इनके प्रयासों ने कश्मीर के छोटे व्यापारियों को भी अपने सामानों की बिक्री के लिए एक बड़ा प्लेट फॉर्म मुहैया कराया है.

‘झेलम कॉर्ट’ कश्मीर का इकलौता ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है. इसकी स्थापना को करीब एक साल पूरा हो गया है. ‘झेलम कॉर्ट’ के जनक अहमद नबील वानी, नवीद कादिर वानी और आरिफ अहमद नज़र कहते हैं, ‘‘इसकी स्थापना के पीछे उद्देश्य था स्थानीय व्यापारियों और संभावित खरीदारों के बीच पुल का काम करना. इसके लिए एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की जरूरत थी, जिसे हमने पूरा करने की कोशिश की है.’’

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वे कहते हैं कई कारणों से बार-बार के व्यवधानों के बीच कश्मीर के स्थानीय लोगों को अनिश्चितताओं के साथ जीवन की गाड़ी आगे बढ़ाने में दिक्कत आ रही थी. घाटी में आतंकवादी गतिविधियों और बार-बार के बंद के कारण व्यापारियों को गंभीर वित्तीय संकट झेलना पड़ रहा था.

विशेष रूप से अनुच्छेद 370 के निरस्त होने और बाद में कोविड-19 लॉकडाउन ने घाटी की आर्थिक दशा पर गंभीर संकट पैदा कर दिया था. लोग घरों में कैद थे और व्यापार ठप था. इसका सबसे ज्यादा असर स्थानीय व्यापारियों और खुदरा विक्रेताओं पर पड़ा.

भौतिक स्टोर बंद होने और इंटरनेट कनेक्टिविटी कट जाने से लोगों की दिनचर्या बिगड़ गई थी. तभी श्रीनगर और अनंतनाग के तीन उद्यमियों अहमद नबील वानी, नवीद कॉमर्स प्लेटफार्मों की तुलना कादिर वानी और आरिफ अहमद नजर को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘झेलम कॉर्ट ’ को जल्द लांच करने का ख्याल आया.

वे स्थानीय व्यापारियों और संभावित कॉमर्स प्लेटफार्मों की तुलना खरीदारों के बीच की खाई को पाटना चाहते थे.एक लोकल मीडिया से बात करते हुए इसके सह-संस्थापकों में से एक अहमद नबील वानी ने कहा, कश्मीर के लोगों के लिए एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस बनाने और सीमित इंटरनेट कनेक्टिविटी सहित कई चुनौतियों का सामना करने के बावजूद वे अपने उद्देश्य में कामयाब हुए हैं.

अहमद नबील ने बताया कि उन्होंने 2018 में ही एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के आइडिया पर काम करना शुरू कर दिया था. झेलम नदी के किनारे बैठक कर इसपर चर्चा की गई कि कैसे कश्मीर के लोग कर्फ्यू और बंद से दशकों से पीड़ित हैं.

वे बताते हैं कि आमतौर पर कश्मीर के लोग इंटरनेट को समस्या के समाधान के रूप में नहीं देखते. अधिकतर इसका मनोरंजन और मनोरंजन के साधन के तौर पर करते हैं. तभी हमारे मन में ख्याल आया कि जो इंटरनेट पर आएगा वह हमारे प्लेटफॉर्म पर भी जरूर आएगा.

इसके बाद व्यापारियों तक बात पहुंचाई गई कि एक खुदरा विक्रेता तभी बिक्री करता है जब उसकी दुकान का शटर खुला हो कॉमर्स प्लेटफार्मों की तुलना और सड़कों पर लोग हों, मगर उनके प्लेटफॉर्म पर आने से सड़क पर चाहे जैसी स्थिति हो उनका व्यापार चलता रहेगा.

उन्होंने कहा कि ‘झेलम कॉर्ट’ की स्थापना में उन्हें अन्य दुश्वारियों के साथ अनुच्छेद 370 और लॉकडाउन के चलते हाई-स्पीड इंटरनेट से वंचित रहने से भी बहुत परेशानी आई. बाद में सब कुछ ठीक हो गया.

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बता दूं कि कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा मोबाइल इंटरनेट पर निर्भर है, पर इसकी गति ज्यादातर समय तक तेज नहीं रहती. कुछ देर बाद ही बेहद धीमी हो जाती है. हालांकि दो साल बाद हाई-स्पीड इंटरनेट बहाल कर दिया गया है.

‘झेलम कॉर्ट’ के संस्थापकों का कहना है कि लांचिंग से पहले उन्होंने अनुसंधान और विकास को विशेष महत्व दिया. करीब छह महीने उन्होंने आर एंड डी पर लगाए. उसके बाद दो साल वेबसाइट और ऐप को डिजाइन में लगाए.

इसे तर्कसंगत बनाने के लिए कई कोड विकसित किया गया. आखिरकार, अनुच्छेद 370 और कोविड-19 महामारी की समस्या समाप्त होते ही 2020 के अंत में वेबसाइट और ऐप का सूक्ष्म अध्ययन और परीक्षण के बाद इसे लांच कर दिया गया.

‘ऑन एयर’ करने से पहले स्थानीय विक्रेताओं को प्लेटफार्म में शामिल किया गया. उन्हांेने बताया कि उपयोगकर्ता के अनुकूल इंटरफेस बनाना उनके लिए दूसरी बड़ी चुनौती थी. हमें एक ऐसा प्लेटफार्म बनाना था जिसमें सीमित संसाधनों के साथ एक साधारण विक्रेता पोर्टल, एक उपयोगकर्ता के अनुकूल डैशबोर्ड और एंड-टू-एंड सुचारू लेनदेन प्रक्रिया हो. उन्होंने बताया कि अभी इसमें सुधार की प्रक्रिया जारी हैं.

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अहमद नबील ने बताया कि वर्तमान में 70-80 विभिन्न प्रकार के विक्रेता मंच से जुड़े हैं. इनमें स्थानीय कलाकार, व्यवसाय, दुकानदार, निर्माता और यहां तक कि स्ट्रीट वेंडर भी शामिल हैं. हस्तशिल्प स्मृति चिन्ह बनाने वाले स्ट्रीट वेंडर को खास तौर से प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है.

कश्मीर के सूखे मेवे बेचने वाले, शॉल और हस्तशिल्प उत्पाद बेचने वाले और पर्यटन पर निर्भर लोगों को भी इसमें जगह दी गई है. इनकी संख्या बढ़ाने पर निरंतर काम चल रहा है. इसका असर यह हुआ है कि अमेजन या फ्लिपकार्ट जैसे बड़े ई-कॉमर्स के प्लेटफार्म के साथ खरीदार ‘झेलम कॉर्ट’ को भी खंगालने लगे हैं.

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जानकर हैरानी होगी कि यह एक ऐसा अनूठा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है जहां ग्राहकों को विक्रेता के साथ सौदेबाजी कर कम कीमतों में सामान खरीदने का भी विकल्प मिलता है. ‘झेलम कार्ट’ के सह-संस्थापकों में से एक नबील ने कहा,“यह पहला ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है जहां ग्राहक विक्रेता के साथ संवाद कर सकते हैं और सबसे कम कीमत पर मोलभाव कर सकते हैं.’’

उनका ई-कॉमर्स शॉपिंग प्लेटफॉर्म खरीदारों को विक्रेताओं की तुलना में अधिक शक्ति देता है, जो कि अन्य ई-कॉमर्स वेबसाइटों में नहीं है.रीयल-टाइम सौदेबाजी की सुविधा ग्राहकों को यह संतुष्टि देती है कि उन्होंने सस्ती दरों के लिए कड़ी मेहनत नहीं करनी पड़ी. यह विक्रेताओं को भविष्य के सौदों के लिए ग्राहकों के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाने में भी मदद कर रहा है.

Celia

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रिलायंस ने अपनी ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस प्लान को क्यों टाल दिया?

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Ltd) कथित तौर पर थर्ड-पार्टी सेलर के लिए एक स्टैंडअलोन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म लॉन्च करने और अमेज़ॅन (Amazon) और फ्लिपकार्ट (Flipkart) के साथ प्रतिस्पर्धा करने की अपनी योजना को स्थगित कर रही है। इस बीच, हजारों इंडिपेंडेंट सेलर्स को इसके मौजूदा प्लेटफॉर्म (JioMart) में पहले ही इंटीग्रेट कर दिया गया है।

इस लेख में, हम जानेंगे कि मुंबई स्थित बहुराष्ट्रीय समूह ने अपनी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को विकसित करने की अपनी योजना को क्यों रोक दिया।

ई-कॉमर्स में रिलायंस का व्यापार

भारत के सबसे बड़े रिटेलर, रिलायंस रिटेल वेंचर्स के पूरे भारत में 12,000 से अधिक स्टोर हैं। इसने हाल के सालों में Ajio, JioMart, और Reliance Digital के साथ अपनी ई-कॉमर्स ऑपरेशन्स का विस्तार किया है। 2016 में लॉन्च किया गया Ajio, Reliance का फैशन ई-कॉमर्स वेंचर है, जबकि JioMart (2019 में लॉन्च किया गया) ग्रॉसरी, वैल्यू फैशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और कुछ अन्य श्रेणियों के लिए एक मार्केटप्लेस है। इसी के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेल चेन, Reliance Digital ने अपना ऐप और वेबस्टोर स्थापित किया है।

कोविड महामारी की कठिन परिस्थितियों के बावजूद, JioMart, Ajio, और Reliance Digital के वेबस्टोर ने अच्छा प्रदर्शन किया, जब उपभोक्ता खरीदारी करने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बहुत अधिक निर्भर थे। रिलायंस रिटेल ने भी महामारी के दौरान 65,000 से अधिक लोगों को काम पर रखा, जिनमें से 53,000 से अधिक फ्रेशर थे। रिलायंस ने 2021 में लगभग ₹3,496 करोड़ की ई-कॉमर्स बिक्री की, फिर भी यह अभी भी बाजार के मुख्य (और प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों) अमेज़ॅन(Amazon) और वॉलमार्ट के फ्लिपकार्ट (Flipkart) से पीछे है।

रिलायंस का ई-कॉमर्स में और विस्तार

ऑनलाइन बिज़नेस के दिग्गजों अमेज़ॅन(Amazon) और फ्लिपकार्ट (Flipkart) के साथ कॉमर्स प्लेटफार्मों की तुलना प्रतिस्पर्धा करने के लिए,अब JioMart को एक पूर्ण बाजार के रूप में विकसित कर रहा है, जिसकी सभी श्रेणियों में मजबूत उपस्थिति है। अगस्त में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड JioMarket नामक एक अलग ऑनलाइन मार्केटप्लेस का निर्माण कर रहा था और प्लेटफार्म पर थर्ड-पार्टी सेलर्स को शामिल कर रहा था। इसके अलावा, यह रिलायंस को ई-कॉमर्स पॉलिसी के मसौदे का पालन करने की अनुमति देता।

पॉलिसी में मार्केटप्लेस कॉमर्स प्लेटफार्मों की तुलना कॉमर्स प्लेटफार्मों की तुलना ऑपरेटरों को संबंधित पार्टियों या एसोसिएटेड उद्यमों को उनके प्लेटफार्म पर विक्रेता के रूप में रखने से रोकने का प्रस्ताव है। ई-मार्केट संगठनों से जुड़े उद्यमों को उनके मार्केटप्लेस में सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा। केवल थर्ड पार्टी बिक्री की अनुमति है। सरकार "एल्गोरिदम निष्पक्षता" को बढ़ावा दे रही कॉमर्स प्लेटफार्मों की तुलना है, जो कुछ विक्रेताओं को प्रेफरेंशियल विचार देने से ई-मार्केटप्लेस को मना करती है। यह सुनिश्चित करने के लिए है, कि स्वतंत्र विक्रेताओं को उचित व्यवहार मिले। ई-मार्केट संगठनों पर अक्सर कुछ पसंदीदा विक्रेताओं के साथ उपभोक्ता डेटा और खरीदारी की आदतों को साझा करने का आरोप लगाया जाता है। उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त कानूनों को लागू किया जाना है।

अब, जैसा कि सरकार ने प्रस्तावित ई-कॉमर्स पॉलिसी को रोक दिया है, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने थर्ड -पार्टी सेलर के लिए एक अलग ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस बनाने की अपनी योजना को छोड़ दिया है। इसके बजाय, इसने हजारों इंडेपेंडेंट सेलर्स को अपने मौजूदा प्लेटफॉर्म JioMart में इंटिग्रेट किया है।

JioMarket को सुझाए गए ई-कॉमर्स पॉलिसी स्टैंडर्ड्स का पालन करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। रिलायंस एक सिंगल प्लेटफॉर्म, JioMart स्थापित करना चाहता है, जिसे वह अमेज़ॅन(Amazon) और फ्लिपकार्ट (Flipkart) के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार करेगा। अब जब पॉलिसी पीछे हट रही है, तो इन दोनों बड़े प्रतिस्पर्धियों के खिलाफ लड़ने के लिए दो प्लेटफार्मों को विकसित करना चुनौतीपूर्ण होता।

आगे का रास्ता

JioMart पहले ही 15,000 से अधिक थर्ड पार्टी इंडिपेंडेंट सेलर्स और direct-to-consumer (D2C) ब्रांडों को शामिल कर चुका है, जिन्हें Reliance Retail ने JioMarket के लिए पिछले 3-4 महीनों में ऑनबोर्ड किया था। पिछले साल की दिवाली की तुलना में प्लेटफॉर्म का कुल कलेक्शन 80 गुना बढ़ गया है। इसने अमेज़ॅन(Amazon) और फ्लिपकार्ट (Flipkart) द्वारा दी जाने वाले ऑफर्स के साथ फेस्टिवल सेल भी शुरू किया है, जिनमें से कुछ थर्ड पार्टी सेलर्स और D2C ब्रांडों द्वारा किए गए हैं।

ई-कॉमर्स ने भारतीय बिज़नेस ऑपरेशन्स में क्रांति लाई हैं। 2022 के अंत तक, भारतीय ई-कॉमर्स बाजार 21.5% से बढ़कर 74.8 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है! अमेज़ॅन(Amazon) को भारत में # 1 ई-कॉमर्स कंपनी के रूप में सम्मानित किया जाता है, जबकि फ्लिपकार्ट (Flipkart) वर्चस्व की प्रतिस्पर्धा में कड़ी टक्कर दे रहा है।

क्या JioMart को अमेज़ॅन(Amazon) और फ्लिपकार्ट (Flipkart) के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, या यह अमेज़ॅन(Amazon) और फ्लिपकार्ट (Flipkart) जैसे ई-कॉमर्स दिग्गजों को कड़ी टक्कर देगा? हमें मार्केटफीड ऐप के कमेंट सेक्शन में हमें अपने विचार बताएं!

24 औन लाइन/दूरी प्रोग्राम्स में ई-कॉमर्स 2023

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