शुरुआती लोगों के लिए अवसर

डिजिटल करेंसी क्या होती है

डिजिटल करेंसी क्या होती है
cryptocurrency में bitcoin सबसे ज्यादा लोकप्रिय और महंगी Virtual money है. Image: (freepik.com)

Budget 2022 : जानें, Cryptocurrency और Digital Currency में क्या है अंतर?

आज एडिटरजी आपको बताने जा रहा है कि आखिर डिजिटल करेंसी और डिजिटल करेंसी क्या होती है क्रिप्टो करेंसी ( Difference between Digital Currency and Cryptocurrency ) में अंतर क्या है.

ये क्रिप्टो, क्रिप्टो क्या है, ये क्रिप्टो क्रिप्टो. बजट 2022 के वक्त, क्रिप्टो में निवेश कर चुके करोड़ों लोगों का ध्यान वित्त मंत्री पर सिर्फ इसीलिए था कि वे जान सकें, वित्त मंत्री इस मार्केट से जुड़ा क्या ऐलान करेंगी. वित्त मंत्री ने आरबीआई द्वारा डिजिटल करेंसी ( RBI Digital Currency ) जारी करने की घोषणा की और मुनाफे पर 30 पर्सेंट टैक्स की बात भी की लेकिन क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कोई ऐलान नहीं किया. आज एडिटरजी आपको बताने जा रहा है कि आखिर डिजिटल करेंसी और क्रिप्टो करेंसी ( Difference between Digital Currency and Cryptocurrency ) में अंतर क्या है.

कौन करता है जारी

- डिजिटल करेंसी या CBDC को सरकार या सेंट्रल बैंक जारी करती है. इसे रेग्युलेट सेंट्रल बैंक करता है

- क्रिप्टोकरेंसी को निजी संस्थाएं स्वतंत्र रूप से डेवलप करती हैं. क्रिप्टो के लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है, जो क्रिप्टो ट्रांजेक्शन का हिसाब रखने वाला डिजिटल बहीखाता प्रणाली है.

किसके पीछे कौन?

डिजिटल करेंसी को देश और सेंट्रल बैंक जारी करते हैं, इसका मतलब है कि टेक्निकल ब्रेकडाउन की स्थिति में यही रेग्युलेटर उसे कंट्रोल करेंगे.
डिजिटल करेंसी सेंट्रलाइज्ड है; लेनदेन की प्रक्रिया, सेंट्रल बैंक से जुड़े सर्वर से होती है.
व्यापक तौर पर उतार-चढ़ाव वाली कीमतों के साथ ट्रेड किए जाने वाले एसेट से उलट, सेंट्रल बैंक की डिजिटल करेंसी, फिजिकली अस्तित्व में नहीं होती है लेकिन इसकी स्वीकृति बड़े पैमाने पर होती है.
उधर, क्रिप्टोकरेंसी अपने बने स्ट्रक्चर के अंदर डीसेंट्रलाइज्ड होती है; नियम, क्रिप्टो कम्युनिटी में ज्यादातर पार्टिसिपेंट्स के जरिए तय किए जाते हैं और इनमें अनियमित अस्थिरता होती है.

डिजिटल करेंसी / CBDC कौन इस्तेमाल कर रहा है ?

चीन का सेंट्रल बैंक, अपने सीबीडीसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, चीन के कुछ प्रांतों में ट्रायल के तौर पर युआन का एक वर्चुअल वर्शन जारी किया गया है. पीपल्स बैंक ऑफ चाइना, सीबीडीसी को पूरी तरह से लॉन्च करने वाली पहली संस्था हो सकती है. चीन, पहले ही सभी क्रिप्टो पर बैन लगा चुका है.

जापान में, लगभग 70 जापानी फर्मों का एक कंसोर्टियम जिसमें देश के तीन मेगा-बैंक भी शामिल हैं, वे 2022 के मध्य में डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल से जुड़ा प्रयोग शुरू करेंगे.

ब्लॉग: डिजिटल करेंसी का स्वागत कीजिए

डिजिटल करेंसी के पीछे क्रिप्टोकरेंसी का जोर है. क्रिप्टोकरेंसी केंद्रीय बैंकों के नियंत्रण से पूर्णत: बाहर है. इस करेंसी को बनाने का उद्देश्य था कि सरकारी बैंकों द्वारा कभी-कभी अधिक मात्रा में नोट छाप कर बाजार में डाल दिए जाते हैं जिससे महंगाई बहुत तेजी से बढ़ती है. लोगों की सालों की गाढ़ी कमाई कुछ ही समय में शून्यप्राय हो जाती है.

digital currency crypto currency rbi narendra modi government | ब्लॉग: डिजिटल करेंसी का स्वागत कीजिए

ब्लॉग: डिजिटल करेंसी का स्वागत कीजिए

Highlights डिजिटल करेंसी एक नंबर होता है जिसे आप अपने मोबाइल अथवा कम्प्यूटर पर रख सकते हैं. कई केंद्रीय बैंकों ने डिजिटल करेंसी जारी करने का मन डिजिटल करेंसी क्या होती है बनाया है. डिजिटल करेंसी केंद्रीय बैंक के गैरजिम्मेदाराना व्यवहार से हमारी रक्षा नहीं करती है.

भारतीय रिजर्व बैंक डिजिटल करेंसी जारी करने पर विचार कर रहा है. डिजिटल करेंसी हमारे नोट की तरह ही होती है. अंतर यह होता है कि यह कागज पर छपा नोट नहीं होता है बल्कि यह एक नंबर मात्र होता है जिसे आप अपने मोबाइल अथवा कम्प्यूटर पर संभाल कर रख सकते हैं.

उस नंबर को किसी के साथ साझा करते ही उस नंबर में निहित रकम सहज ही दूसरे व्यक्ति के पास पहुंच जाती है.

डिजिटल करेंसी के पीछे क्रिप्टोकरेंसी का जोर है. क्रिप्टोकरेंसी केंद्रीय बैंकों के नियंत्रण से पूर्णत: बाहर है. इस करेंसी को बनाने का उद्देश्य था कि सरकारी बैंकों द्वारा कभी-कभी अधिक मात्रा में नोट छाप कर बाजार में डाल दिए जाते हैं जिससे महंगाई बहुत तेजी से बढ़ती है. लोगों की सालों की गाढ़ी कमाई कुछ ही समय में शून्यप्राय हो जाती है.

जैसे यदि आप 100 रुपए के नोट से वर्तमान में 5 किलो गेहूं खरीद सकते हैं तो महंगाई तेजी से बढ़ने के बाद उसी 100 रुपये के नोट से आप केवल 1 किलो गेहूं खरीद पाएंगे. इस प्रकार की स्थिति से बचने के लिए इन इंजीनियरों ने क्रिप्टोकरेंसी का आविष्कार किया जिससे कि बैंकों द्वारा नोट अधिक छापे जाने से उनकी क्रिप्टो करेंसी की कीमत पर कोई प्रभाव न पड़े.

केंद्रीय बैंकों द्वारा क्रिप्टोकरेंसी का विरोध तीन कारणों से किया जा रहा है. पहला यह कि अर्थव्यवस्था केंद्रीय बैंक के नियंत्रण से बाहर निकलने को हो जाती है. जैसे यदि देश में महंगाई अधिक हो रही है और रिजर्व बैंक ने मुद्रा के प्रचलन को कम किया तो क्रिप्टो करेंसी का चलन बढ़ सकता है और सरकार की नीति फेल हो सकती है.

दूसरा विरोध यह है कि क्रिप्टो करेंसी फेल हो सकती हैं. जैसे यदि कम्प्यूटर का नंबर हैक हो जाए अथवा क्रिप्टोकरेंसी बहुत भारी संख्या में बनाई जाने लगे तो आज जिस बिटकॉइन को आप ने एक लाख रुपए में खरीदा वह कल पांच हजार रुपए की हो सकती है.

तीसरा विरोध यह कि क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग आपराधिक गतिविधियों को सपोर्ट करने के लिए किया जा सकता है. इसलिए यदि केंद्रीय बैंक जिम्मेदार है और अर्थव्यवस्था सही चल रही है तो क्रिप्टोकरेंसी उसे अस्थिर बना सकती है.

दूसरी तरफ यदि बैंक गैर जिम्मेदार है जैसे महंगाई बेतहाशा बढ़ रही है तो क्रिप्टोकरेंसी लाभप्रद हो जाती है. उस परिस्थिति में व्यापार करना कठिन हो जाता है.

आज आपने किसी व्यापारी से एक बोरी गेहूं का सौदा एक हजार रुपये में किया. कल उस एक हजार रुपये की कीमत आधी रह गई. बेचने वाले ने सौदे से इंकार कर दिया. आप यह सौदा क्रिप्टोकरेंसी में करते तो यह कठिनाई नहीं आती.

अत: यदि केंद्रीय बैंक द्वारा बनाई गई मुद्रा अस्थिर हो तो क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से व्यापार सुचारु रूप से चल सकता है. यदि केंद्रीय बैंक जिम्मेदार है तो क्रिप्टोकरेंसी अस्थिरता पैदा करती है लेकिन यदि केंद्रीय बैंक गैर जिम्मेदार है तो क्रिप्टोकरेंसी लाभप्रद हो सकती है.

इस स्थिति में कई केंद्रीय बैंकों ने डिजिटल करेंसी जारी करने का मन बनाया है. डिजिटल करेंसी और क्रिप्टोकरेंसी में समानता यह है कि दोनों एक नंबर होते हैं जो आपके मोबाइल में रखे जा सकते हैं. लेकिन क्रिप्टो करेंसी की तरह डिजिटल करेंसी गुमनाम नहीं होती है.

रिजर्व बैंक द्वारा इसे उसी तरह जारी किया जाएगा जैसे नोट छापे जाते हैं. इसलिए डिजिटल करेंसी केंद्रीय बैंक के गैरजिम्मेदाराना व्यवहार से हमारी रक्षा नहीं करती है.

नोट छापने की तरह केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी भी भारी मात्रा में जारी कर महंगाई पैदा कर सकती है. लेकिन फिर भी मुद्रा को सुरक्षित रखने में डिजिटल करेंसी मदद करती है क्योंकि आपको नोटों को आग, पानी और चोरों से बचाना नहीं है.

यदि कभी आप अपनी करेंसी का नंबर भूल जाएं अथवा आपका मोबाइल चोरी हो जाए तो आपकी पहचान करके उसे वापस प्राप्त करने की व्यवस्था की जा सकती है.

मेरा मानना है कि डिजिटल करेंसी का हमें स्वागत करना चाहिए भले यह केंद्रीय बैंक के गैरजिम्मेदाराना आचरण से हमारी रक्षा नहीं करती है. केंद्रीय बैंक के गैरजिम्मेदाराना व्यवहार को इस प्रकार के तकनीकी आविष्कारों से नहीं रोका जा सकता है.

उसे ठीक करने का कार्य अंतत: राजनीति का है और उस व्यवस्था को सुदृढ़ करना चाहिए. पर डिजिटल करेंसी के माध्यम से नोट को छापने और रखने का खर्च कम होता है और आपस में लेनदेन भी सुलभ हो सकता है इसलिए हमें डिजिटल करेंसी का स्वागत करना चाहिए.

विकासशील देशों में डिजिटल मुद्रा – cryptocurrency पर रोक लगाने की पुकार

डिजिटल मुद्रा - crypto currency

संयुक्त राष्ट्र के व्यापर और विकास संगठन – UNCTAD ने बुधवार को प्रकाशित तीन नीति पत्रों में, विकासशील देशों में डिजिटल मुद्रा – क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) पर रोक लगाने के लिये कार्रवाई किये जाने की पुकार लगाई है.

यूएन एजेंसी ने आगाह किया है कि अलबत्ता व्यक्तिगत डिजिटल मुद्राओं ने कुछ व्यक्तियों और संस्थानों को लाभान्वित किया है, मगर वो एक ऐसी अस्थिर वित्तीय सम्पदा हैं जो सामाजिक जोखिम और लागतें उत्पन्न कर सकती हैं.

अंकटाड ने कहा है कि कुछ लोगों या संस्थानों को डिजिटल मुद्रा के लाभ, वित्तीय स्थिरता, घरेलू संसाधन सक्रियता, और मुद्रा प्रणालियों की सुरक्षा के लिये उत्पन्न उनके जोखिमों के साए में दब जाते हैं.

क्रिप्टो मुद्रा में उछाल

क्रिप्टो करेंसी भुगतान का एक वैकल्पिक रूप हैं. इनके मामलों में वित्तीय भुगतान गुप्त व सुरक्षित टैक्नॉलॉजी के ज़रिये डिजिटल माध्यमों से किया जाता है जिन्हें ब्लॉकचेन कहा जाता है.

क्रिप्टो करेंसी कोविड-19 महामारी के दौरान, दुनिया भर में बहुत तेज़ी से बढ़ी, जिससे पहले से ही मौजूद चलन और भी ज़्यादा मज़बूत हो गया. इस समय दुनिया भर में लगभग 19 हज़ार क्रिप्टो करेंसी मौजूद हैं.

वर्ष 2021 में क्रिप्टो करेंसी रखने वाली आबादी के मामले में, शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं वाले 20 देशों में से, 15 देश विकासशील देश थे.

इस सूची में 12.7 प्रतिशत के साथ यूक्रेन सबसे ऊपर था, उसके बाद रूस 11.9 प्रतिशत और वेनेज़ुएला 10.3 प्रतिशत के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर थे.

उतना स्वर्णिम नहीं

अंकटाड का कहना है कि बाज़ार में हाल के समय में डिजिटल मुद्रा को लगे झटकों से झलकता है कि क्रिप्टो करेंसी रखने के डिजिटल करेंसी क्या होती है निजी जोखिम तो हैं ही, मगर केन्द्रीय बैंक, वित्तीय स्थिरता की हिफ़ाज़त करने के लिये हस्तक्षेप करते हैं तो ये समस्या सार्वजनिक बन जाती है.

उससे भी ज़्यादा, अगर क्रिप्टो करेंसी भुगतान के एक माध्यम के रूप में विकसित होना जारी रखती है, और यहाँ तक कि अनौपचारिक रूप में घरेलू मुद्राओं की जगह भी ले लेती है, तो भी देशों की वित्तीय सम्प्रभुता ख़तरे में पड़ सकती है.

कर चोरी का भय

अंकटाड के एक नीति पत्र में बताया गया है कि क्रिप्टो करेंसी विकासशील देशों में किस तरह से घरेलू संसाधन सक्रियता को कमज़ोर करने का एक नया चैनल बन गई है, और साथ ही इस बारे में, बहुत कम कार्रवाई और उसमें भी डिजिटल करेंसी क्या होती है देरी करने के जोखिमों के बारे में भी आगाह किया गया है.

अंकटाड ने आगाह किया है कि क्रिप्टो करेंसी से वैसे तो विदेशों से अपने मूल स्थानों को रक़म भेजना आसान होता है, मगर उनसे कर चोरी व अवैध वित्तीय लेनदेन के ज़रिये टैक्स से बचाना भी शामिल हो सकता है. बिल्कुल टैक्स स्वर्ग कहे जाने वाले स्थानों की तरह, जहाँ धन का स्वामित्व स्पष्ट नहीं होता है.

एजेंसी ने कहा है कि इस तरह से, क्रिप्टो करेंसी मुद्रा नियंत्रणों की प्रभावशीलता को भी कमज़ोर कर सकती है, जोकि विकासशील देशों को उनके नीतिगत स्थान और छोटे पैमाने पर आर्थिक स्थिरता के लिये एक अहम उपकरण है.

डिजिटल करेंसी/मुद्रा क्या है, निबंध, फायदे, नुकसान (Digital Currency in Hindi)

डिजिटल क्षेत्र में आज भारत किसी भी देश से कम नहीं। 2015 का वह साल था जब भारत ने पहली बार डिजिटल इंडिया कैंपेन की शुरुआत की थी। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपनाने वाले तब और अब के भारत में काफी अच्छा बदलाव देखने को मिला है। 2015 से लेकर 2022 तक के सफर में भारत ने डिजिटल प्लेटफार्म में अपनी एक अलग ही पहचान बना ली है। शॉपिंग, बिल भरने से लेकर बिजनेस करने तक, भारत डिजिटल बन चुका है। पिछले कुछ सालों में भारत डिजिटली बहुत प्रगति कर चुका है। ऐसे बहुत सारे स्कीम्स डिजिटल हो चुके हैं जैसे BHIM UPI, DIGI LOCKER, CoWIN, Aadhar, GEMS इत्यादि। इन सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने भारत के नागरिकों के कामों को काफी आसान कर दिया है। अब भारत बैंकिंग के क्षेत्र में भी एक बहुत बड़ा बदलाव लाने की कोशिश कर रही है। यह बदलाव भारत की सरकार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के साथ मिलकर डिजिटल करेंसी यानी डिजिटल मुद्रा को लाकर करना चाहती है। तो क्या है डिजिटल करेंसी और यह किस तरह भारत के लोगों के पैसों को एक डिजिटल प्लेटफार्म में बदल देगी? यह आर्टिकल आपको डिजिटल करेंसी/मुद्रा से जुड़ी सभी जानकारी देगा।

digital currency kya hai in hindi

Table of Contents

डिजिटल करेंसी/मुद्रा क्या है (What is Digital Currency)

जब किसी देश के नगदी रुपयों को डिजिटल सिस्टम में स्टोर किया जाता है और उसे इलेक्ट्रॉनिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है उसे हम डिजिटल करेंसी कहते हैं। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं जैसे आप ही के पैसों का एक इलेक्ट्रॉनिक रूप जैसे आपके पैसों या किसी भी एसिड का इलेक्ट्रॉनिक टोकन या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्म में इस्तेमाल किया जाने वाला। डिजिटल मुद्रा देश के नागरिकों और बैंकिंग सेक्टर ओं को ऐसा मौका देगा जिससे पैसों को लेकर सब कुछ इलेक्ट्रॉनिक होता हुआ नजर आएगा जैसे बैंकों में लंबी लाइन नहीं लगानी पड़ेगी और बस इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर मिनटों में ही उनका पैसा स्टार्ट हो जाएगा या फिर वह कुछ ही मिनटों में अपना पैसा कहीं पर भी इस्तेमाल कर सकेंगे।

डिजिटल करेंसी एवं रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (Digital Currency RBI)

भारत की फाइनेंस मिनिस्टर के नेतृत्व में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की बैठक हुई जिसमें डिजिटल करेंसी के ऊपर चर्चा की गई थी। चर्चा में भारत सरकार ने सेंट्रल बैंक से डिजिटल करंसी की शुरुआत करने की बात रखी। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने सेंट्रल बैंक को डिजिटल करंसी लाने का सुझाव दिया जिससे लोग पैसों को डिजिटली इस्तेमाल कर सकें। भारतीयों का क्रिप्टो करेंसी के तरफ बहुत ज्यादा झुकाव को लेकर सरकार ने यह तय किया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक ऐसा तरीका लेकर आए जिससे भारत के लोग अपने पैसों को डिजिटली इस्तेमाल कर सकें और डीजिटली कमा सकें। एक ऐसा तरीका जिससे लोगों का समय भी बच्चे और उनका पैसा सलामत भी रहे और साथ ही साथ यह देश डिजिटल उपकरणों को लेकर स्मार्ट बनें। ‌

विदेशों में डिजिटल करेंसी की लहर (Digital Currency in Abroad)

पूरे विश्व में 86% सेंट्रल बैंक ऐसे हैं जैसे ब्रिटेन की बैंक, चाइना की बैंक, अमेरिका की बैंक जो अपने कन्वेंशनल पैसों को बदलना चाह रही हैं यानी उन्हें बदलकर इलेक्ट्रॉनिक/डिजिटल बनाना चाह रही हैं। इस विषय पर कितने प्रतिशत देश काफी चर्चा कर रही है और इस पर काफी खोजबीन भी कर रही है।आपको बता दें कि पूरे विश्व में अब तक 14% सेंट्रल बैंक ने तो पायलट प्रोजेक्ट्स भी शुरू कर दिया है। उन देशों के सेंट्रल बैंक ने डिजिटल करेंसी पर अपना काम करना भी शुरू कर दिया है।

यह तो हम सभी जानते हैं कि किसी भी नई चीज के आने से जितना उस चीज का फायदा होता है उतना ही वह अपने साथ कुछ नुकसान भी लेकर आती है। ठीक उसी तरह यदि डिजिटल करेंसी देश के लिए काफी अच्छा बदलाव साबित होगी तो वह अपने साथ कुछ नुकसान भी लेकर आएगी जैसे यह डिजिटल मुद्रा के कुछ नुकसान हो सकते हैं:

  • डिजिटल करेंसी के आने से बैंकों में कर्मचारियों को काफी नुकसान हो सकता है क्योंकि इस मुद्रा के आने से बैंकों को मैन पावर कम चाहिए होगी
  • ऐसा हो सकता है कि कितने ही सारे बैंकों का कारोबार कम हो जाएगा क्योंकि सब कुछ इलेक्ट्रॉनिक रूप से होगा और पैसा भी इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल करेंसी क्या होती है ही बन जाएगा
  • इससे बैंकिंग सेक्टर में काम करने वाले लोगों के बीच अपनी जॉब को लेकर सुरक्षा महसूस होने में कमी हो सकती है
  • डिजिटल करेंसी के आने से देश के कई बैंकों को अपना मैन पावर कम करना पड़ सकता है
  • बैंकिंग सेक्टर में काम करने वाले कई लोगों की नौकरी चले जाने की सिक्योरिटी पर सवाल उठ सकते हैं

डिजिटल करेंसी के प्रकार (Digital Currency Types)

डिजिटल करेंसी के तीन प्रकार हो सकते हैं जैसे:

  • सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी
  • वर्चुअल करेंसी
  • क्रिप्टो करेंसी

डिजिटल करेंसी से संबंधित लेटेस्ट न्यूज़ (Digital Currency Latest News)

2022 का यूनियन बजट संसद में 1 फरवरी, 2022 को पेश किया गया। भारत की वित्त मंत्री ‘निर्मला सीतारमण’ ने बजट के दौरान यह एलान किया कि वर्ष 2022-2023 में डिजिटल करेंसी की शुरुआत होगी। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि जो भारतीय क्रिप्टो करेंसी में निवेश कर रहे हैं उन्हें 30 फ़ीसदी टैक्स का भुगतान करना पड़ेगा। भारत सरकार आरबीआई यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के साथ डिजिटल करेंसी को लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। बजट सेशन के दौरान वित्त मंत्री ने अपनी बात रखी कि सेंट्रल बैंक डिजिटल करंसी भारत की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। इससे भारत एक सस्ते एवं कुशल करेंसी सिस्टम की ओर बढ़ेगा।

डिजिटल करेंसी का उपयोग कैसे करें (How to Use)

माना जा रहा है कि भारत में लाई जाने वाली डिजिटल करेंसी दुनियाभर में प्रचलित क्रिप्टो करेंसी और बिटकॉइन की तरह ही उपयोग की जाएगी। इसमें फर्क सिर्फ इतना होगा कि डिजिटल करेंसी सरकारी करेंसी होगी। इस पर सरकारी यानी कानून का मोहर होगा। डिजिटल करेंसी को कैसे उपयोग करें, इसकी गाइडलाइंस रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी की जाएगी। डिजिटल करेंसी को ब्लॉकचेन और अन्य टेक्नोलॉजी की मदद से इंट्रोड्यूस किया जाएगा जिसे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जारी करेगी।

निष्कर्ष (Conclusion)

आने वाले समय में डिजिटल करेंसी को भारत की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने के रूप में देखा जा रहा है। वर्ष 2022-2023 डिजिटल करेंसी के आगमन का समय बताया जा रहा है। यदि भारत सरकार के डिजिटल करेंसी लॉन्च का फैसला अच्छा साबित हुआ तो यह भारत के डिजिटल क्षेत्र और अर्थव्यवस्था के लिए सही साबित हो सकता है। नई नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से यह भारत के लोगों और सरकार को स्मार्ट नागरिक बनने की ओर जागरूक करता हुआ दिख रहा है। यह भारत की करेंसी को एक सस्ते और कुशल करंसी सिस्टम की ओर ले जाता हुआ साबित हो सकता है।

Cryptocurrency in Hindi: क्रिप्टो करेंसी क्या है? जानिए Digital Currency के बारे में

क्रिप्टोकरेंसी में सबसे ज्यादा नाम आपने बिटक्वॉइन का सुना होगा. Bitcoin दुनिया की सबसे महंगी क्रिप्टोकरेंसी है. इसे आप एक डिजिटल मनी कह सकते हैं. लेकिन (digital currency and cryptocurrency difference) डिजिटल और क्रिप्टोकरंसी में भी अंतर होता है.

By विभूू गोयल Last updated Nov 24, 2021 2,364 0

cryptocurrency में bitcoin सबसे ज्यादा लोकप्रिय और महंगी Virtual money है. Image: (freepik.com)

cryptocurrency में bitcoin सबसे ज्यादा लोकप्रिय और महंगी Virtual money है. Image: (freepik.com)

भारत सरकार संसद के मॉनसून-सत्र में क्रिप्टोकरंसी पर एक बिल लाने जा रही है. Cryptocurrency को लेकर केंद्र की मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि वह भारत में सभी तरह की Cryptocurrency पर प्रतिबंध लगाएगी और वह भारत सरकार की खुदकी एक आधिकारिक (India cryptocurrency) लेकर आएगी. जाहिर है सरकार की ओर से Cryptocurrency bill को डिजिटल करेंसी क्या होती है लेकर आए बयान के बाद पूरे देश में इस समय Cryptocurrency चर्चा में है.

बिटकॉइन पूरी दुनिया में सर्वाधिक लोकप्रिय क्रिप्टोकरंसी है. इसके अतिरिक्त अलग-अलग क्रिप्टोकरंसी एथेरियम और टीथर जैसी क्रिप्टोकरंसी है. आइए विस्तार से जानते हैं क्या है क्रिप्टोकरंसी?

Crypto का अर्थ और Currency का मतलब?

Crypto एक लैटिन भाषा का शब्द है जो cryptography से मिलकर बना है. यदि आप cryptography का अर्थ जानें तो इसका मतलब हुआ “छिपा हुआ” यानी ऐसी करंसी जो छिपी हुई हो और प्रत्यक्ष रूप से सामने नहीं हो तो वह क्रिप्टोकरंसी कहलाती है.

ऐसे ही Currency शब्द भी लैटिन भाषा के शब्द Currentia से निकला है. यह शब्द भी रुपये-पैसे के लिए इस्तेमाल में स्थानीय परिवेश में आम चलन में है. इस तरह क्रिप्टोकरंसी की परिभाषा जानें तो क्रिप्टोकरंसी मुद्रा का एक डिजिटल रूप है, यानी की पैसा आपकी जेब में कागजी नोट, रुपये, सिक्के या किसी ठोस आकार में नहीं होता बल्कि यह डिजिटली होता है और एक खाते से दूसरे एकाउंट में ट्रांसफर होता रहता है.

क्रिप्टोकरंसी ऑनलाइन करंसी है. (cryptocurrency kya hai bataiye) और बिजनेस के सभी तरीकों में इसका प्रयोग बिना किसी नियम के तहत होता है. यानी की डिजिटल करेंसी क्या होती है क्रिप्टोकरंसी में होने वाला व्यापार बिना किसी नियम के होता है. इस पर किसी देश अथवा सरकार का नियंत्रण नहीं होता. कहने का अर्थ यह है कि क्रिप्टोकरंसी को, बैंक, सरकार अथवा अथॉरिटी जारी नहीं करती है.

क्या है क्रिप्टोकरंसी? कैसे होता है प्रयोग?

क्रिप्टोकरंसी को सरल भाषा में समझें तो, जैसे भारत रुपये में, अमेरिका डॉलर में, सउदी अरब रियाल में, इंग्लैंड यूरो में और रशिया रुबल में डील करता है, यानी की लेन-देन के लिए वहां रहने वाले नागरिक पैसे के इस रूप का प्रयोग करते हैं जिसे हम करंसी कहते हैं, सो ऐसे ही डिजिटल दुनिया के बढ़ते चलन के साथ डिजिटल दुनिया में जो एक्सचेंज के लिए जिस करंसी का प्रयोग किया जाता है वह क्रिप्टोकरंसी कहा जाता है.

क्रिप्टोकरेंसी में सबसे ज्यादा नाम आपने Bitcoin का सुना होगा. Bitcoin दुनिया की सबसे महंगी क्रिप्टोकरेंसी है. इसे आप एक डिजिटल मनी कह सकते हैं. Crypto currency का प्रचलन बीते कुछ सालों में सबसे ज्यादा सामने आया है. भारत में साल 2017 के शुरुआती दौर में क्रिप्टोकरंसी Bitcoin शब्द के तौर पर दुनिया के प्रमुख शेयर बाजारों से होती हुई हर मार्केट निवेशक की जबान पर थी.

किसने शुरू की Crypto currency

Crypto currency की शुरुआत साल 2009 से मानी जाती है. Crypto currency को जन्म देने वाले थे (cryptocurrency ke janak) सतोशी नाकामोतो. हालांकि सतोशी नाकामोतो (satoshi nakamoto, bitcoin) पहले व्यक्ति नहीं थे जिन्होंने किसी डिजिटल मुद्रा को शुरू किया था बल्कि कई और भी निवेशक और देश थे जिन्होंने डिजिटल मुद्रा की कल्पना की थी और बाकायदा उस पर काम भी हो रहा था्. बीबीसी की एक खबर के मुताबिक एक ऑस्ट्रेलियाई शख्स क्रेग राइट ने साल 2016 में खुदको बिटकॉइन के जनक कहा था.

Bitcoin क्या है? क्यों है यह सबसे महंगी Virtual Currency

क्रिप्टोकरेंसी में आपसे सबसे ज्यादा नाम Bitcoin का सुना होगा. दरअसल, Bitcoin एक डिजिटल कैश प्रणाली है जिसका सीधा चलन उसके कम्प्यूटर एल्गोरिदम से कनेक्ट करता है.

Bitcoin सिर्फ डिजिट के रूप में ऑनलाइन अस्तित्व में रहती है और सबसे खास बात यह है कि यह एक स्वतंत्र सत्ता के रूप में है, यानी की इस समय दुनिया के किसी देश या सरकार Bitcoin को कंट्रोल नहीं कर सकती है.

आपको जानकार आश्चर्य होगा कि शुरुआत में Bitcoin अवैध घोषित की गई, लेकिन Bitcoin ने लोकप्रियता के शिखर छू लिए और यही वजह थी कि कई देशों ने इसे वैध कर दिया. मीडिया में आई रिपोर्ट्स बताती हैं कि अब कुछ देश खुद की क्रिप्टोकरेंसी पर काम कर रहे हैं. बताते चलें कि Bitcoin विश्व की सबसे महंगी वर्चुअल करेंसी कही जाती है.

Bitcoin के अलावा कितने प्रकार की Crypto currency

क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर आपने सबसे ज्यादा Bitcoin का नाम सुना होगा, (cryptocurrency list) लेकिन आपको जानकार आश्चर्य होगा कि पूरी दुनिया में (Crypto currency types) इस समय तकरीबन 1800 से ज्यादा Crypto currency चलन में हैं. इसमें एथेरियम जिसे शॉर्ट में ETH कहा जाता है यह एक प्रमुख डिजिटल मनी है, ऐसे ही लिटकोइन (LTC), डॉगकॉइन (Dogecoin) फेयरकॉइन (FAIR), डैश (DASH), पीरकॉइन (PPC), रिपल (XRP) जैसी Crypto currency को आप Bitcoin के अलावा प्रयोग कर सकते हैं.

Digital Currency और Crypto currency में होता है अंतर

Crypto currency को समझते हुए आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि Crypto currency और Digital Currency में अंतर होता है. अक्सर यह गलतफहमी हो जाती है कि Crypto currency और Digital Currency दोनों एक ही हैं, लेकिन दोनों मूलभूत अंतर यह होता है कि डिजिटल करंसी को सरकार मान्यता देती है जबकि Cryptocurrency गुप्त करंसी होती है और इस पर किसी भी सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता. Cryptocurrency control से बाहर होने के चलते ही प्रतिबंध के दायरे में आई है.

क्रिप्टोकरंसी का इस्तेमाल आपराधिक और आतंकी गतिविधियों सहित नशे के कारोबार में होने का खतरा होता है, लिहाजा इसे कई देशों ने प्रतिबंध के दायरे में लाया है. (digital currency and cryptocurrency differencein hindi) दुनिया के कई देशों में Digital Currency को मान्यता है. जिन देशा में Digital Currency चलती है उनमें, चीन जापान और स्वीडन जैसे देश हैं जबकि इक्वाडोर, बाहमास, ट्यूूूशिनिया, सेनेगल जैसे देश शामिल हैं. चर्चा है कि जल्द ही अमेरिका और ब्रिटेन भी Digital Currency लाने की योजना में है.

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