चरण निर्देश

आय के कई स्रोतों के प्रकार

आय के कई स्रोतों के प्रकार
3. व्यापारिक बैंक ( Trading bank ) – व्यापार की अल्पकालीन ऋणों की आवश्यकता को पूरा करते हैं। इनके द्वारा प्रदत ऋणों को चालू पूंजी के रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है।

Income Tax- India TV Hindi

Financial Sources

1. साधारण अंश या समता अंश ( Ordinary fraction )- समता अंश वे हैं जिनके धारकों को कंपनी के संचालन की सामान्य जोखिम को उठाना होता है। इन आय के कई स्रोतों के प्रकार अंशों के धारकों कंपनी के प्रबंध एवं संचालन को नियमित एवं नियंत्रित करने का अधिकार होता है।

2. पूर्वाधिकार अंश ( Preference share )- उन अंशों से हैं, जिन पर अंश धारियों आय के कई स्रोतों के प्रकार को एक निश्चित दर से प्रतिवर्ष लाभांश पाने का अधिकार होता है तथा समापन के समय पूंजी की वापसी का पूर्व अधिकार होता है।

3. ऋण पत्र ( Loan letter )- ऋण पत्र कंपनी के सार्वमुद्रा के अधीन जारी एक ऐसा प्रलेख है जो कंपनी पर ऋण को प्रमाणित करता है तथा ऋण की प्रमुख शर्तों को प्रकट करता है।

4. अर्जित आय का आय के कई स्रोतों के प्रकार पुनः निवेश ( Re-invested income )- कम्पनी या संस्था लाभ का एक भाग भविष्य की आवश्यकता के लिए संचय करके रख लेती है। संचित लाभ को कंपनी अपनी पूंजी के रूप में प्रयोग कर लेती है। उसे अर्जित आय का पुनः निवेश कहते हैं।

अल्पकालीन वित्त के स्रोत ( Short term finance sources )

1. सार्वजनिक निक्षेप या जमाएं ( Public deposits or deposits )- एकाकी व्यापार या साझेदारी संस्थाएं केवल अपने संबंधियों से ही व्यवसायिक उद्देश्यों के लिए जमाएं स्वीकार कर सकते हैं तथा केवल निजी कार्यों के लिए ही जन सामान्य से जमाएं स्वीकार कर सकते हैं।

2. व्यापारिक ऋण या साख ( Trade credit or credit ) –

  • चालू उधार खाता – कुछ स्थायी ग्राहक होते हैं। वह माल क्रय करते हैं। ऐसी दशा में उनके खातों में एक निश्चित राशि का माल उधार बेचने की शर्त हो सकती है। उधार की राशि की सीमा का निर्धारण क्रेता की आर्थिक स्थिति एवं भुगतान प्रवृत्ति को ध्यान में रखकर किया जाता है।
  • विनिमय विपत्र – – विक्रेता व्यापारी माल बेचते समय ही माल के भुगतान के लिए विनिमय विपत्र लिख देता है तथा क्रेता उसे स्वीकार कर लेता है।
  • प्रतिज्ञा पत्र – कई व्यापारी माल खरीदने के साथ ही माल के मूल्य के भुगतान की तिथि का एक प्रतिज्ञा पत्र लिख देते हैं। इन में लिखी तिथि पर विक्रेता क्रेता से धन की मांग कर लेता है तथा क्रेता भुगतान कर देता है।
  • हुण्डियां – व्यापारी कई बार माल क्रय करने के साथ ही हुण्डी लिखकर देते हैं। हुण्डी में लिखित तिथि को भुगतान हो जाता है।
  • अदत्त खर्चे- कुछ खर्चे देय होने के बहुत दिनों बाद भुगतान करना पड़ता है। उदाहरण – बिक्री कर, आयकर, बिजली के बिल की राशि आदि।

वित्तीय स्रोतों के मामले में बिहार की स्थिति कमजोर : सिद्दीकी

पटना। वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि वित्तीय स्रोतों के मामले में राज्य की स्थिति पहले से ही कमजोर है। राजनीतिक वायदे को पूरा करने और सातवें वेतन आयोग को लागू करने से वित्तीय संकट के और बढ़ने की आशंका है। केंद्र सरकार योजनाओं में केंद्रीय सहायता राशि में कटौती से राज्य पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। वित्त आयोग के मानदंड में बिहार को विशेष दर्जा की सुविधा मिलनी चाहिए। वह शुक्रवार को आद्री द्वारा 14वें वित्त आयोग के ज्ञापन पर तैयार दस्तावेज के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे।


उन्होंने कहा कि बिहार हर साल नेपाल से बाढ़ रूपी समस्या का आयात करता है, जो राज्य के आधारभूत संरचना को आय के कई स्रोतों के प्रकार ध्वस्त कर देती है। राज्य के राजस्व का एकमात्र स्रोत कर है और इसमें कई छिद्र हैं, जिन्हें रोकना होगा। वित्तीय स्रोतों को मजबूत करने के लिए राज्य में टैक्स लगाना ही एकमात्र इलाज नहीं है। इसके लिए सरकार को अन्य उपाय तलाशने होंगे। खर्च में कटौती के अलावा सरकार को कामकाज के तरीके में बदलाव करना होगा। इसका एक कारण राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव भी हो सकता है।

विदेशी सेवाओं के लिए भत्ता

अगर, आप सरकारी नौकरी में हैं और आपकी नियुक्ति देश के बाहर है और इसके एवज में कोई भत्‍ता मिलता है, तो उस पर इनकम टैक्‍स नहीं लगेगा। इनकम टैक्‍स की धारा 10(7) में यह प्रावधान किया गया है कि सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मी जो विदेश में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और उसकी एवज में उनको भत्‍ता मिल रहा है तो वह टैक्‍स फ्री होगा।

वेतनभोगी कर्मचारियों की वेतन का एक हिस्‍सा ग्रेच्युटी के रूप में काटा जाता है। कंपनी एक निश्‍चित अवधि तक नौकरी करने के बाद कर्मचारी को ग्रेच्‍युटी का भुगतान करती है। ग्रेच्‍युटी से होने वाली आमदनी पूरी तरह टैक्‍स फ्री होती है।

स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति से आय

स्‍वैच्छिक सेवानिवृत्ति से होने वाली आमदनी में 5 लाख रुपए तक की आय टैक्‍स फ्री होती है। इनकम टैक्‍स की धारा 2BA के अनुसार अगर कोई व्‍यक्ति किसी कंपनी या लोकल अथॉरिटी आय के कई स्रोतों के प्रकार से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेता है, तो इससे होने वाली आय पर 5 लाख रुपए तक टैक्‍स छूट मिलेगा।

कृषि से होने वाली आय पर सरकार टैक्‍स नहीं लेती है। इनकम टैक्‍स की धारा 1961 के तहत कृषि से होने वाली आय पर टैक्‍स छूट दी गई है। कृषि से हुई आय पर टैक्‍स छूट मिलता है। करदाता कृषि से होने वाली आय को अपने रिटर्न में दिखाकर टैक्‍स छूट प्राप्‍त कर सकता है।

सेविंग अकाउंट से आय

अगर सेविंग अकाउंट से मिलने वाला ब्याज 10,000 रुपए से कम है तो इस पर टैक्‍स नहीं देना होता है। यह छूट एक से अधिक अकाउंट से मिलने वाले ब्याज पर भी मिलती है। अगर, आपके पास एक से अधिक बैंक अकाउंट है और उन पर क्रमश: 10000 रुपए और 5000 रुपए ब्याज मिलता है तो आपकी टैक्सेबल इनकम 5000 रुपए होगी।

अगर, आप किसी पार्टनरशिप फर्म में पार्टनर हैं और उसके शेयर आपके पास हैं तो इनकम टैक्‍स की धारा10(2) के अनुसार फर्म में हुई आय के लिए पार्टनर इनकम टैक्‍स भरने के लिए उत्तरदायी नहीं है। शेयर के अलावा अगर आप पारिश्रमिक या दूसरे लाभ लेते आय के कई स्रोतों के प्रकार हैं तो यह आय टैक्सेबल इनकम के दायरे में आएगी।

बैंक की आय का प्रमुख स्रोत क्या है?

इसे सुनेंरोकेंसामान्य सेवाओं से आय- इस मद के अन्तर्गत लोक सेवा आयोग, पुलिस, रेल, रक्षा सेवाएँ आदि मदों से प्राप्त आय सम्मिलित की जाती है। सार्वजनिक उपक्रमों से आय- इसमें सार्वजनिक संस्थानों से प्राप्त आय सम्मिलित होती है; जैसे-इण्डियन ऑयल, प्राकृतिक तेल एवं गैस आयोग, राज्य व्यापार निगम, डाक-तार, रेल आदि से प्राप्त आय।

राकेश विभिन्न स्रोतों से आय प्राप्त करता है निम्न में से कौन सी आय राकेश की निष्क्रिय आय है?

इसे सुनेंरोकेंरेंटल इनकम आपकी आय का एक निष्क्रिय स्रोत होती है

भारत में राजस्व का प्रमुख स्रोत क्या है?

इसे सुनेंरोकेंराजस्व का मुख्य स्त्रोत है आयकर24 जुल॰ 2017

इसे सुनेंरोकेंब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की स्थापना से पूर्व भारतीय अर्थव्यवस्था स्वतंत्र थी। कृषि जनसामान्य की आजीविका और सरकार की आय का मुख्य आय के कई स्रोतों के प्रकार स्रोत था,फिर भी विनिर्माण गतिविधियाँ भी जारी थी। भारत में निर्मित इन वस्तुओं का विश्व के बाजोरों में अच्छी सामग्री के प्रयोग तथा उच्च स्तर की कलात्मकता के आधार पर काफी प्रतिष्ठा प्राप्त था।

भारत में आय का सबसे बड़ा स्रोत क्या है?

इसे सुनेंरोकेंवर्तमान में सरकार की आय का प्रमुख स्रोत “वस्तु एवं सेवा कर” (33 % योगदान) है इसके बाद कारपोरेशन टैक्स (27%) और आय कर की हिस्सेदारी 23% है

कौन सा कर भारत की आय का सबसे बड़ा स्रोत है?

भारत की राष्ट्रीय आय का प्रमुख स्त्रोत है

1) कृषि क्षेत्र
2) सेवाक्षेत्र
3) उघोंग क्षेत्र
4) व्यापार क्षेत्र
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सेविंग अकाउंट से आय

अगर सेविंग अकाउंट से मिलने वाला ब्याज 10,000 रुपए से कम है तो इस पर टैक्‍स नहीं देना होता है। यह छूट एक से अधिक अकाउंट से मिलने वाले ब्याज पर भी मिलती है। अगर, आपके पास एक से अधिक बैंक अकाउंट है और उन पर क्रमश: 10000 रुपए और 5000 रुपए ब्याज मिलता है तो आपकी टैक्सेबल इनकम 5000 रुपए होगी।

अगर, आप किसी पार्टनरशिप आय के कई स्रोतों के प्रकार फर्म में पार्टनर हैं और उसके शेयर आपके पास हैं तो इनकम टैक्‍स की धारा10(2) के अनुसार फर्म में हुई आय के लिए पार्टनर इनकम टैक्‍स भरने के लिए उत्तरदायी नहीं है। शेयर के अलावा अगर आप पारिश्रमिक या दूसरे लाभ लेते हैं तो यह आय के कई स्रोतों के प्रकार आय टैक्सेबल इनकम के दायरे में आएगी।

लांग टर्म कैपिटल गेन

इक्विटी या म्युचुअल फंड में किए हुए निवेश पर होने वाले लांग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्‍स छूट मिलती है। इनकम टैक्‍स की धारा 10(36) के तहत अगर एक साल से उससे अधिक समयावधि में शेयर आय के कई स्रोतों के प्रकार या म्युचुअल फंड बेचने से कैपिटल गेन होता है, तो उस पर इनकम टैक्‍स छूट मिलती है। हालांकि,डेट म्युचुअल फंड पर यह लागू नहीं होता है और इससे होने वाली आय पर टैक्‍स देना होता है।

किसी भी प्रकार की छात्रवृत्ति या पुरस्कार पर इनकम आय के कई स्रोतों के प्रकार टैक्‍स नहीं लगता है। इनकम टैक्‍स एक्ट 1961 के तहत छात्रवृत्ति या पुरस्कार के अंतर्गत मिलने वाली रकम पर इनकम टैक्‍स नहीं लिया जाता है। छात्रवृत्ति या पुरस्कार की राशि तय नहीं की गई है।

सीनियर सिटिजन सेविंग स्‍कीम

अगर आप वरिष्ठ नागरिक हैं और आपने सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम (SSSS) में निवेश कर रखा है तो आपकी मूल राशि पर कोई टैक्‍स नहीं लगेगा। लेकिन, इसके ब्याज से होने वाली आय पर आपको टैक्‍स देना पड़ सकता है। साथ ही इस बात का भी ख्याल रखें कि इसका उलेल्ख आपको आयकर रिटर्न में भी करना होगा।

इनकम टैक्‍स की धारा 10 (11,12,13) के अनुसार ऐसी आय जो पीपीएफ, पीएफ या सेवानिवृत्ति निधि से होता है तो उस पर इनकम टैक्‍स नहीं चुकाना होता है।

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